अध्याय 103

सेठ एक पल को ठिठका, जैसे अचानक उसे यह बात याद आ गई हो। उसने उसके चेहरे पर उतरती ठंडक देखी और होंठ भींच लिए। “क्या मैंने? मुझे तो याद नहीं कि मैंने ऐसा कहा हो।”

बिस्तर से उतरते हुए लैला जैसे जम-सी गई और उसे हैरानी से देखने लगी।

लेकिन सेठ का चेहरा मासूम ही रहा, मानो सचमुच उसे कुछ याद न हो।

लैला ने...

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